पटना (Surjeet Kumar): बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव की सदन में वापसी के साथ ही सियासी पारा चढ़ गया है। कई दिनों की गैरमौजूदगी के बाद तेजस्वी के सदन पहुंचने पर MLC सुनील सिंह ने उनका बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेजस्वी यादव केवल खराब स्वास्थ्य (Health Issues) के कारण सदन नहीं आ रहे थे। उन्होंने सत्ता पक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि लोग उनकी अनुपस्थिति को जानबूझकर गलत तरीके से ‘Divert’ कर रहे थे। सुनील सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि तेजस्वी यादव अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और आज सदन की कार्यवाही में शामिल हुए हैं। उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी विपक्ष का कोई बड़ा नेता बीमार होता है या निजी कारणों से अनुपस्थित रहता है, तो सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक कमजोरी के रूप में पेश करने की कोशिश करता है।
Biscomaun Election Controversy: अशोक चौधरी पर 5 करोड़ के ऑफर का आरोप
बिस्कोमान (Biscomaun) के इलेक्शन को लेकर चल रहे विवाद पर सुनील सिंह ने मंत्री अशोक चौधरी को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चौधरी ने विधायकों को तोड़ने के लिए अपने घर से 5-5 करोड़ रुपये देने की बात कही थी। सुनील सिंह ने दावा किया कि बिस्कोमान चुनाव में उनके पैनल के 11 लोग जीते थे, जबकि सत्ता और सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल के बावजूद चौधरी का पैनल हार गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे खुद यह चुनाव नहीं लड़ रहे थे क्योंकि उनके दो ‘Terms’ पूरे हो चुके थे। सुनील सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार की पूरी शक्ति मिलकर उनके खिलाफ काम कर रही थी। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को लोकतंत्र की मर्यादा के खिलाफ बताया और कहा कि जनता सब देख रही है।
Nepotism and Fraud Allegations: दामाद की नियुक्ति और ‘प्रोफेसर’ चोले पर सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान सुनील सिंह ने अशोक चौधरी पर परिवारवाद (Nepotism) और फर्जीवाड़े के भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चौधरी ने अपने दामाद को फर्जी तरीके से मुजफ्फरपुर से प्रतिनिधि बनाया ताकि उन्हें अध्यक्ष पद दिलाया जा सके। उन्होंने 2008 के नियमों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि उस वक्त उनके दामाद की उम्र मात्र 15 साल थी, तो यह नियुक्ति कैसे हुई? इसके अलावा, सुनील सिंह ने अशोक चौधरी के प्रोफेसर बनने की प्रक्रिया को भी संदिग्ध बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी गरीब दलित का हक मारकर वे प्रोफेसर बने हैं। उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा कि ऐसे लोग बार-बार अपना ‘Political Chola’ बदलते हैं और कभी इधर तो कभी उधर जाकर सत्ता का सुख भोगते हैं। इन आरोपों के बाद बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा होने की संभावना बढ़ गई है।


