पटना (Patna): बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी ने जातीय समीकरण (Caste Equations) और राज्य की वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था को लेकर विपक्ष पर बड़ा हमला बोला है। पटना में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने राजद (RJD) के 15 साल के शासनकाल पर गंभीर सवाल खड़े किए। चौधरी ने स्पष्ट रूप से कहा कि लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में अतिपिछड़ों और पिछड़ों के उत्थान के लिए कोई ठोस Policy नहीं बनाई गई थी। मंत्री ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही सामाजिक न्याय की असली नींव रखी है। उन्होंने पंचायती राज संस्थानों में आरक्षण (Reservation in Panchayati Raj) का प्रावधान किया और जननायक कर्पूरी ठाकुर के विचारों को धरातल पर उतारा। चौधरी के अनुसार, जब सरकार इन नीतियों को लागू कर रही है, तो विपक्षी दलों को बेचैनी हो रही है क्योंकि उनके पास गिनाने के लिए कोई उपलब्धि नहीं है।
Tejashwi Yadav की सदन में वापसी पर तंज: ‘वह तो खिलाड़ी हैं’
बिहार विधानसभा सत्र (Bihar Assembly Session) में तेजस्वी यादव की लंबे समय बाद हुई वापसी पर अशोक चौधरी ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “तेजस्वी जी एक खिलाड़ी (Player) हैं और वह अक्सर खेलते रहते हैं। शायद खेलने के दौरान ही उनके पैर में चोट लग गई होगी, जिस वजह से वह इतने दिनों तक सदन की कार्यवाही (Assembly Proceedings) में शामिल नहीं हो पाए।” अशोक चौधरी ने यह भी याद दिलाया कि जब नीतीश कुमार Caste Census (जातीय जनगणना) की बात कर रहे थे, तब तेजस्वी यादव केवल उनके Follower की तरह व्यवहार कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आज जब राज्य सरकार अपनी नीतियों से पिछड़ों को सशक्त कर रही है, तब विपक्ष को राजनीति करने के लिए कोई नया मुद्दा नहीं मिल रहा है।
Outsourcing और UGC Case पर सरकार का बड़ा स्टैंड
सरकारी विभागों में चल रहे Outsourcing के विवादों पर मंत्री ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार इन मामलों की गंभीरता से जांच (Investigation) कराएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो वास्तविक Beneficiaries (लाभार्थी) हैं, उन्हें उनका पूरा हक और पैसा सीधा मिले। इसमें किसी भी तरह की बिचौलिया संस्कृति या धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं, UGC से जुड़े संवेदनशील मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक चौधरी ने कहा कि फिलहाल यह प्रकरण Supreme Court के अधीन है। अदालत ने इस पर रोक (Stay Order) लगा रखी है, इसलिए न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा। सरकार कानून के दायरे में रहकर छात्रों और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।


