Highway पर E-Rickshaw Ban: High Court के आदेश के खिलाफ Sheikhpura में भारी Chakka Jam

Patrakar Babu News Desk
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E-Rickshaw Highway Ban Sheikhpura

बिहार के शेखपुरा जिले में आज ई-रिक्शा चालकों ने High Court के उस आदेश के खिलाफ Chakka Jam कर दिया, जिसमें Highway और NH पर ई-रिक्शा के परिचालन पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। ई-रिक्शा संघ के बैनर तले सैकड़ों चालकों ने अभ्यास मध्य विद्यालय के समीप सड़क पर अपने वाहन खड़े कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। चालकों का कहना है कि जिला मुख्यालय में प्रवेश के लिए हाईवे का उपयोग करना उनकी मजबूरी है, और इस Official Order से हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट मंडराने लगा है। प्रदर्शन के दौरान ई-रिक्शा संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने बताया कि शेखपुरा शहर में वर्तमान में 4500 से अधिक ई-रिक्शा चल रहे हैं। हाई कोर्ट के इस आदेश के कारण गरीब चालकों के सामने आर्थिक तंगी (Financial Crisis) पैदा हो गई है। चालकों ने स्पष्ट किया कि यदि उन्हें हाईवे पर चलने से रोका गया, तो वे यात्रियों को गंतव्य तक नहीं पहुंचा पाएंगे, जिससे उनकी Daily Earning पर सीधा असर पड़ेगा।

आजीविका का संकट और High Court से आदेश वापसी की मांग

ई-रिक्शा संघ के सदस्यों का तर्क है कि शेखपुरा की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि बिना हाईवे पर चढ़े शहर के मुख्य हिस्सों तक नहीं पहुंचा जा सकता। ई-रिक्शा चालकों ने मांग की है कि High Court अपने इस आदेश पर पुनर्विचार करे, अन्यथा हजारों गरीब परिवारों का भरण-पोषण असंभव हो जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं निकाला, तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन रूप ले सकता है। इस Chakka Jam के कारण शहर के भीतर यातायात व्यवस्था तो सुचारू रही, लेकिन लंबी दूरी तय करने वाले यात्री हलकान नजर आए। संघ के कोषाध्यक्ष सत्यम अकेला और उपाध्यक्ष अर्जुन पासवान ने कहा कि ई-रिक्शा चालक समाज के सबसे निचले तबके से आते हैं और प्रशासन को उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।

Nagar Parishad का भारी टैक्स और CPI का समर्थन

हाईवे पर पाबंदी के अलावा, ई-रिक्शा चालकों ने नगर परिषद की टैक्स नीति के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। चालकों का आरोप है कि Nagar Parishad मनमाने ढंग से ₹50 प्रतिदिन का टैक्स वसूल रहा है, जिससे यात्रियों पर किराए का बोझ बढ़ता है। संघ की मांग है कि इस Tax Rate को घटाकर ₹20 किया जाए। ई-रिक्शा संघ के इस आंदोलन को CPI (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी) का भी पुरजोर समर्थन मिला है। सीपीआई के जिला मंत्री प्रभात पांडेय ने इसे मजदूरों के साथ अन्याय करार देते हुए कहा कि प्रशासन को अपना आदेश वापस लेना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगे पूरी नहीं हुईं, तो सभी संगठन गोलबंद होकर Mass Protest करेंगे। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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