भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) के उपसचिव राजेश्वर लाल ने आज शेखपुरा (Sheikhpura) का दौरा कर फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की समीक्षा की। नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा चिन्हित प्राथमिकता वाले जिलों में शामिल शेखपुरा में इस बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए ‘Special Drive’ चलाई जा रही है। उपसचिव ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने साल 2027 तक पूरे देश से फाइलेरिया को समाप्त करने का डेडलाइन (Deadline) तय किया है। निरीक्षण के दौरान उपसचिव ने जिले में बीमारी की वर्तमान स्थिति और दवाओं के स्टॉक (Medicine Stock) की जांच की। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया कि फाइलेरिया एक ‘Slow Progressive’ बीमारी है, जो शरीर को स्थायी रूप से अक्षम बना देती है। इस मिशन के तहत अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें केवल दवाएं बांटेंगी नहीं, बल्कि ‘Door-to-Door’ जाकर अपनी मौजूदगी में लोगों को दवा खिलाना (Drug Administration) सुनिश्चित करेंगी।
NITI Aayog का विशेष फोकस और 2027 का Roadmap
शेखपुरा को इस अभियान के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि यह नीति आयोग के एस्पिरेशनल जिलों (Aspirational Districts) की सूची में शामिल है। उपसचिव राजेश्वर लाल, जिन्हें नालंदा और शेखपुरा का प्रभारी (In-charge) नियुक्त किया गया है, ने बताया कि बिहार के सभी जिलों में यह ‘Mass Drug Administration’ (MDA) प्रोग्राम युद्ध स्तर पर चल रहा है। कल चेवाड़ा प्रखंड में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें जिला पदाधिकारी (DM) भी शामिल होकर रणनीति साझा करेंगे।
‘Polio Free’ की तर्ज पर ‘Filaria Free’ मिशन की अपील
उपसचिव ने आम जनता से अपील की है कि वे स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें और बिना किसी डर के दवा का सेवन करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह सामूहिक प्रयास से भारत ने ‘Polio’ को जड़ से खत्म किया, ठीक उसी तरह फाइलेरिया के विरुद्ध इस जंग को भी जीतना अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह बीमारी शुरुआत में साधारण लगती है लेकिन भविष्य में शरीर के अंगों में भारी सूजन (Elephantiasis) का कारण बनती है, जिसका एकमात्र बचाव समय पर ‘Preventive Medicine’ लेना है।


