बिहार के जहानाबाद जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की एक डरावनी तस्वीर सामने आई है। नगर थाना क्षेत्र के ‘बस सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल’ (Bus Super Specialist Hospital) में इलाज के दौरान एक प्रसूता और उसके अजन्मे बच्चे की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों और निजी क्लीनिकों के बीच चल रहे Referral System के खेल की वजह से महिला को अपनी जान गंवानी पड़ी। पीड़ित परिवार के अनुसार, प्रसूता को सबसे पहले मखदुमपुर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ से उसे Sadar Hospital जहानाबाद रेफर कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि सदर अस्पताल में जानबूझकर भर्ती प्रक्रिया में देरी की गई और बाद में ‘नाइट ऑपरेशन’ की सुविधा न होने का बहाना बनाकर अस्पताल कर्मियों ने ही उन्हें इस Private Hospital में शिफ्ट होने का दबाव बनाया।
इलाज के नाम पर लूट और Medical Ethics का उल्लंघन
अस्पताल में भर्ती होने के कुछ ही घंटों बाद प्रसूता और शिशु की मौत हो गई। मृतका के परिजनों ने बताया कि महिला पूरी तरह स्वस्थ थी और Admit होने के आधे घंटे बाद तक बातचीत कर रही थी। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज शुरू करने से पहले ही ₹20,000 की मांग की, जिसमें से ₹10,000 एडवांस जमा करा लिए गए थे। घटना के बाद अस्पताल की लापरवाही तब और उजागर हुई जब प्रबंधन ने इलाज से जुड़े सभी Medical Documents और Ultra-sound Report अपने कब्जे में ले लिए। परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने डॉक्टरों से मौत का कारण पूछा, तो संतोषजनक जवाब देने के बजाय अस्पताल प्रशासन ने पुलिस बुला ली। इस दौरान अस्पताल परिसर में घंटों अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
Police Investigation और प्रशासन की चुप्पी
मामले की सूचना मिलते ही नगर थाना की Police मौके पर पहुंची और पूछताछ के लिए दो लोगों को हिरासत में लिया है। हैरानी की बात यह है कि घटना के बाद से ही अस्पताल के जिम्मेदार डॉक्टर और स्टाफ फरार हैं, जिस कारण अब तक कोई Official Statement सामने नहीं आया है। जहानाबाद के Civil Surgeon और जिला प्रशासन की टीम इस मामले की जांच कर रही है। यह घटना न केवल Medical Negligence का मामला है, बल्कि सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और निजी क्लीनिकों की अवैध वसूली की ओर भी इशारा करती है। परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषी अस्पताल का Registration रद्द कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।


