सहरसा के ऐतिहासिक Veer Kunwar Singh Chowk पर आज भारतीय ट्रेड यूनियन (CITU), किसान सभा और विभिन्न वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने National General Strike के तहत जोरदार प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी बंद (Nationwide Strike) के आह्वान पर आज गुरुवार को दोपहर 12 बजे से सहरसा के विभिन्न चौक-चौराहों को पूरी तरह जाम कर दिया गया। इस विरोध प्रदर्शन का प्राथमिक उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा लाए गए Labor Codes को वापस लेने, फसलों पर MSP Legal Guarantee सुनिश्चित करने और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग करना है। संगठनों द्वारा किए गए इस Chakka Jam की वजह से सहरसा के प्रमुख मार्गों पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया, जिससे आवाजाही पर गहरा प्रभाव पड़ा।
Labor Codes और पुरानी पेंशन योजना (OPS) पर तकरार
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर मजदूर और किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। किसान सभा के वरिष्ठ नेता रणधीर यादव ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वे चार नए Labor Codes का पुरजोर विरोध करते हैं, क्योंकि यह कानून श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करता है। इसके साथ ही, सार्वजनिक संस्थानों में मजदूर संगठनों की मान्यता बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। आंदोलनकारियों का एक बड़ा मुद्दा Old Pension Scheme की बहाली भी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए। इस Protest में शामिल संगठनों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी बुनियादी मांगों पर Official Notification जारी नहीं होता, तब तक उनका संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
MSP Guarantee और MGNREGA मजदूरी में वृद्धि की मांग
सड़कों पर उतरे कार्यकर्ताओं ने केवल श्रम कानूनों ही नहीं, बल्कि कृषि और ग्रामीण विकास के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि किसानों को फसलों का उचित दाम दिलाने के लिए Minimum Support Price (MSP) की कानूनी गारंटी दी जाए। इसके अलावा, MGNREGA के तहत काम करने वाले मजदूरों की दैनिक मजदूरी में तत्काल वृद्धि करने की अपील की गई है। सहरसा के विभिन्न हिस्सों में यह प्रदर्शन फिलहाल Peaceful Protest के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि सुरक्षा की दृष्टि से स्थानीय प्रशासन ने भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी है। Public Transport प्रभावित होने के कारण यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वामपंथी संगठनों ने साफ कर दिया है कि यह देशव्यापी हड़ताल सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई है।


