पटना (Patna) स्थित Bihar Vidhan Parishad परिसर के पोर्टिको में आज विपक्षी सदस्यों ने मुख्यमंत्री Nitish Kumar के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी दल के नेता पूर्व मुख्यमंत्री Rabri Devi पर दी गई टिप्पणी को लेकर आक्रोशित हैं और सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने (Apology) की मांग पर अड़ गए हैं। भाकपा माले (CPI-ML) की MLC Shashi Yadav के नेतृत्व में विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी की और सरकार पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि राज्य के संवैधानिक प्रमुख द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग बिहार की राजनीति के गिरते स्तर को दर्शाता है। विपक्ष का कहना है कि जब तक मुख्यमंत्री इस पर Official Statement जारी कर खेद प्रकट नहीं करते, तब तक सदन सुचारू रूप से नहीं चलेगा।
“अपराधियों का बढ़ रहा मनोबल”: MLC Shashi Yadav का सीधा हमला
विरोध प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बात करते हुए MLC Shashi Yadav ने मुख्यमंत्री के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के मुख्यमंत्री ही इस प्रकार की विवादित टिप्पणी (Controversial Remark) करेंगे, तो इससे समाज में गलत संदेश जाता है और अपराधियों के मनोबल को बढ़ावा मिलता है। यादव ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि हम यहाँ मुख्यमंत्री से केवल माफी मांगने की मांग (Demand) करने आए हैं क्योंकि यह बिहार की गरिमा का सवाल है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सत्तापक्ष अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए व्यक्तिगत छींटाकशी का सहारा ले रहा है। CPI-ML और अन्य सहयोगी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि सदन के भीतर इस मुद्दे पर ‘Adjournment Motion’ जैसी स्थिति पैदा की जाएगी ताकि मुख्यमंत्री को जवाब देने के लिए बाध्य किया जा सके।
Vidhan Parishad Portico में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
पोर्टिको में चल रहे इस हंगामे के कारण सदन का माहौल काफी गरमा गया है। Opposition Parties का कहना है कि मुख्यमंत्री का बयान न केवल एक पूर्व मुख्यमंत्री का अपमान है, बल्कि यह पूरी नारी शक्ति के खिलाफ है। हंगामे को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, लेकिन विपक्षी सदस्य अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। सदन की कार्यवाही के दौरान भी इस मुद्दे के गूंजने की पूरी संभावना है। सत्तापक्ष की ओर से अभी तक इस पर कोई Official Notification या स्पष्टीकरण नहीं आया है, जिससे गतिरोध और बढ़ने के आसार हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद 2026 के आगामी चुनावों के मद्देनजर एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।


