सहरसा जिले के नौहट्टा प्रखंड स्थित उर्दू प्राथमिक विद्यालय, महुआ (Mahua) से शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाला एक Viral Video सामने आया है। यहाँ School Hours के दौरान ही बच्चों को जबरन घर भेजकर शिक्षक स्कूल परिसर में ही आराम फरमाते पकड़े गए। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे इस वीडियो में एक शिक्षक चटाई बिछाकर मोबाइल देखते हुए चैन की नींद सोते नजर आ रहे हैं, जबकि यह समय छात्रों की कक्षाएं संचालित करने का था। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय के Headmaster की मनमानी के चलते प्रतिदिन दोपहर 2 बजे ही बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है। नियमतः स्कूल का समय शेष होने के बावजूद शिक्षकों की यह लापरवाही बच्चों के Academic Career के साथ बड़ा खिलवाड़ है। जाँच में पाया गया कि विद्यालय में कुल 6 शिक्षक (Teachers) पदस्थापित हैं, लेकिन मौके पर केवल 2 शिक्षक ही उपस्थित थे, जबकि बाकी Duty से नदारद मिले।
‘आउट एरिया’ का फायदा उठाकर सरकारी नियमों की धज्जियां
इस विद्यालय की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर शिक्षक और प्रधानाध्यापक शिक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहे हैं। Ground Report के मुताबिक, स्कूल मुख्य धारा से कटे हुए ‘आउट एरिया’ में स्थित है, जिसके कारण विभागीय अधिकारियों का निरीक्षण यहाँ कम ही हो पाता है। इसी का लाभ उठाकर Attendance Register में हेरफेर और समय से पहले स्कूल बंद करने का खेल महीनों से चल रहा है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे सरकारी वेतन लेने वाले गुरुजी क्लासरूम को बेडरूम बनाकर सो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जब इस बारे में सवाल किया जाता है, तो प्रधानाध्यापक और शिक्षक कोई संतोषजनक जवाब नहीं देते। Education Department के सख्त निर्देशों के बावजूद सहरसा के इस प्रखंड में नियम ताक पर रखे गए हैं।
मर्ज किए गए स्कूलों की स्थिति और भी भयावह
लापरवाही की इंतहा यहीं खत्म नहीं होती। उर्दू प्राथमिक विद्यालय महुआ में मर्ज (Merge) किए गए नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, शाहपुर चाही (Shahpur Chahi) का हाल तो और भी बुरा मिला। यहाँ जाँच के दौरान न तो कोई शिक्षक मौजूद था और न ही एक भी छात्र। यह स्थिति दर्शाती है कि जिले में Primary Education की निगरानी प्रणाली पूरी तरह फेल हो चुकी है। अब देखना यह होगा कि District Education Officer (DEO) इस Viral Video का संज्ञान लेकर दोषी शिक्षकों और प्रधानाध्यापक के खिलाफ क्या Action लेते हैं। अभिभावकों ने मांग की है कि ऐसे शिक्षकों को तत्काल Suspend किया जाए जो बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं।


