Eco-Friendly Holi 2026: जामताड़ा की JSLPS दीदियों का कमाल, पलाश के फूलों से तैयार किया 5 क्विंटल ‘Natural Gulal’

Patrakar Babu News Desk
3 Min Read
Herbal Gulal JSLPS Jamtara

Jamtara News Update: होली 2026 के मद्देनजर जामताड़ा जिले के नाला प्रखंड की JSLPS (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) से जुड़ी महिलाओं ने पर्यावरण-अनुकूल रंगों की एक बड़ी खेप तैयार की है। इन दीदियों ने केमिकल युक्त रंगों के विकल्प के रूप में करीब 5 क्विंटल (500 KG) प्राकृतिक अबीर-गुलाल का उत्पादन किया है। यह पहल न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए Self-Employment (स्वरोजगार) का एक सशक्त जरिया भी बन गई है। बीपीएम गणेश महतो ने बताया कि इस Natural Product की डिमांड इतनी अधिक है कि जामताड़ा के नाला, कुंडहित, फतेहपुर, कर्माटांड़ और नारायणपुर सहित छह प्रखंडों में 50-50 किलो गुलाल पहले ही भेजा जा चुका है। इसके अलावा दुमका, देवघर और धनबाद जैसे पड़ोसी जिलों से भी लगातार Bulk Orders मिल रहे हैं। पिछले वर्ष राज्य स्तर पर सम्मानित होने के बाद, इस बार दीदियां रिकॉर्ड उत्पादन कर नाला प्रखंड का नाम रोशन करने की तैयारी में हैं।

पलाश के फूलों और Food Color से तैयार हुई ‘Chemical-Free’ चमक

इन प्राकृतिक रंगों को तैयार करने के लिए Traditional Method का उपयोग किया गया है। जेएसएलपीएस से जुड़ी महिलाओं, राधा मंडल और फूलटूसी रूईदास ने बताया कि सबसे पहले पलाश के फूलों को सुखाकर उन्हें बारीक छाना जाता है। इसके बाद इसमें कपूर का उपयोग कर एक बेहतरीन Natural Fragrance (सुगंध) दी जाती है। चमक बढ़ाने के लिए केवल Food Grade Colors का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित (Skin Friendly) है। बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों के मुकाबले यह स्वदेशी अबीर काफी हल्का और खुशबूदार है। महिलाओं के अनुसार, यह कार्य उनके लिए अतिरिक्त आय का बड़ा स्रोत बन गया है, जिससे उनकी Financial Condition में काफी सुधार हो रहा है। हरा, बैंगनी, पीला, लाल, नारंगी और पिंक जैसे रंगों में उपलब्ध यह उत्पाद पूरी तरह Handmade है।

महिलाओं को मिल रही है Loan Facility और सरकारी प्रोत्साहन

प्रशासनिक स्तर पर भी इस मुहिम को काफी सराहा जा रहा है। बीपीएम गणेश महतो ने जानकारी दी कि जिला स्तर पर महिलाओं के लिए Loan Facility और क्रेडिट लिमिट को बढ़ाया जा रहा है ताकि वे अधिक स्वावलंबी बन सकें। JSLPS का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी बनाना और बाजार में उनके उत्पादों को एक नई पहचान दिलाना है। होली की तारीख नजदीक आते ही दीदियां दिन-रात उत्पादन में जुटी हुई हैं। यह प्रयास न केवल Environment Protection को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’ के विजन को भी धरातल पर उतार रहा है। जामताड़ा का यह मॉडल अब पूरे झारखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है।

Share This Article
Follow:
Patrakar Babu News Desk (पत्रकार बाबू न्यूज़ डेस्क) हमारी पूरी संपादकीय टीम की सामूहिक आवाज़ है। यहाँ अनुभवी पत्रकारों, रिसर्चर्स और संपादकों की एक समर्पित टीम 24/7 काम करती है ताकि आप तक देश-दुनिया, राजनीति, शिक्षा और समाज से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर सबसे पहले और सटीकता के साथ पहुँच सके।
कोई टिप्पणी नहीं