बिहार के बाढ़ अंतर्गत Athmal Gola Railway Station पर बीती 20 जनवरी को Kamala Ganga Intercity Express में हुई लूटपाट की हाई-प्रोफाइल घटना पूरी तरह फर्जी निकली है। स्वर्ण व्यवसायी अनिकेत कुमार द्वारा दर्ज कराया गया Looting Case पुलिस जांच में झूठा पाया गया। Rail SP अशोक कुमार राय ने Press Conference में खुलासा किया कि यह मामला लूट का नहीं, बल्कि सीट विवाद और छेड़खानी से जुड़ी मारपीट का था। मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित Special Team ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ये सभी गिरफ्तारियां अथमल गोला के कल्याणपुर गांव से हुई हैं। Rail Police के अनुसार, व्यवसायी ने मामले को गंभीर बनाने और पुलिस पर दबाव बनाने के लिए लूटपाट की झूठी कहानी रची थी, जबकि हकीकत में यह दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प थी।
Looting Case का चौंकाने वाला खुलासा: क्या था असली विवाद?
रेलवे पुलिस की Investigation में यह बात सामने आई कि ट्रेन में सफर के दौरान स्वर्ण व्यवसायी अनिकेत कुमार की बहन के साथ सीट पर बैठने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। अनिकेत का आरोप था कि उसकी बहन के साथ छेड़खानी की गई, जिसके बाद उसने फोन करके अपने समर्थकों को स्टेशन पर बुला लिया। इसके बाद ट्रेन में ही अनिकेत, उसके पिता दिलीप कुमार और दूसरे पक्ष के बीच जमकर मारपीट हुई।
Law and Order DSP Rail भास्कर रंजन के नेतृत्व वाली टीम ने जब मामले की गहराई से जांच की, तो लूटपाट के कोई सबूत नहीं मिले। व्यवसायी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए गहने और कैश छीनने का False Statement दिया था। पुलिस ने स्पष्ट किया कि घटना का मुख्य कारण आपसी विवाद और ईगो क्लैश था, जिसे आपराधिक रंग देने की कोशिश की गई।
CCTV Footage और Rail Police की बड़ी कार्रवाई
इस पूरे मामले में CCTV Footage सबसे बड़ा सबूत बनकर सामने आया। रेल एसपी ने बताया कि स्टेशन और ट्रेन के आसपास लगे कैमरों को खंगाला गया, जिसमें मारपीट में शामिल सभी अभियुक्तों की संलिप्तता साफ दिखाई दी। फुटेज के आधार पर ही कल्याणपुर गांव में छापेमारी कर 9 लोगों को Identify और Arrest किया गया।
पकड़े गए सभी आरोपियों को Judicial Custody में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं, पुलिस अब झूठी एफआईआर (Fake FIR) दर्ज कराने के मामले में स्वर्ण व्यवसायी के खिलाफ भी कानूनी पहलुओं की जांच कर रही है। Rail SP ने सख्त चेतावनी दी है कि पुलिस को गुमराह करने के लिए झूठे आपराधिक मामले दर्ज कराने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


