बिहार की राजनीति में जारी भारी उठापटक के बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के National President उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी नई Organizational Committee का विस्तार कर दिया है। शुक्रवार को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कुशवाहा ने नाराज चल रहे विधायकों को साधने की कोशिश की। इस नई लिस्ट में दिनारा से MLA आलोक सिंह को बिहार State President (प्रदेश अध्यक्ष) की कमान सौंपी गई है, जो पार्टी के अंदर बढ़ते असंतोष को थामने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में NDA Alliance के तहत 6 सीटों पर लड़ने वाली कुशवाहा की पार्टी ने 4 सीटों पर Victory हासिल की थी। हालांकि, सरकार गठन के बाद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को Cabinet Minister बनाए जाने पर चार में से तीन विधायकों ने मोर्चा खोल दिया था। इसी Internal Conflict को खत्म करने के लिए कुशवाहा ने अब प्रशांत पंकज और सुभाष चंद्रवंशी को National Executive President की जिम्मेदारी दी है। इसके अलावा हिमांशु पटेल को Principal General Secretary और मदन चौधरी को National Vice President बनाया गया है।
Ministerial Berth विवाद और दो विधायकों की ‘घर वापसी’
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बेटे को मंत्री बनाए जाने से नाराज चल रहे तीन विधायकों में से उपेंद्र कुशवाहा दो को मनाने में सफल रहे हैं। State President बनाए गए आलोक सिंह पहले बगावती सुर अपना रहे थे, लेकिन अब उन्हें संगठन में नंबर दो की हैसियत देकर शांत कर दिया गया है। पार्टी के इस Selection Process में अनुभवी नेताओं को वरीयता दी गई है ताकि संगठन में जारी खींचतान को खत्म किया जा सके। कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि पार्टी का लक्ष्य अब आगामी चुनौतियों के लिए Organizational Structure को मजबूत करना है।
Rameshwar Mahto की गैरमौजूदगी: क्या पार्टी में होगी एक और टूट?
नई कमेटी के विस्तार के बावजूद वरिष्ठ नेता और विधायक रामेश्वर महतो की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। बैठक में रामेश्वर महतो के नहीं पहुंचने पर जब उपेंद्र कुशवाहा से सवाल किया गया, तो उन्होंने बचाव करते हुए कहा कि “सिर्फ एक विधायक ही नहीं, बल्कि मेरी पत्नी स्नेहलता भी इस बैठक में नहीं आईं।” हालांकि, सियासी जानकारों का मानना है कि रामेश्वर महतो की नाराजगी अभी बरकरार है और वे भविष्य में कोई बड़ा Political Move ले सकते हैं। अब देखना यह होगा कि उपेंद्र कुशवाहा द्वारा किए गए इस Organizational Expansion के बाद क्या पार्टी पूरी तरह से एकजुट रह पाएगी या रामेश्वर महतो की दूरी Rashtriya Lok Morcha में किसी बड़ी टूट का संकेत है। फिलहाल, नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाना और Allies के साथ तालमेल बिठाना है।


