Trump vs NATO: ग्रीनलैंड पर ट्रंप की ‘जिद्द’ से पश्चिमी देशों में फूट! पुतिन ने ली चुस्की, बोले- ‘तुम जानो, तुम्हारा काम जाने’

Patrakar Babu News Desk
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मॉस्को/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की ‘ग्रीनलैंड’ (Greenland) को अमेरिका का हिस्सा बनाने की महत्वकांक्षा ने पश्चिमी दुनिया में भूचाल ला दिया है। एक तरफ ट्रंप इसे हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका के सबसे पुराने सहयोगी यानी NATO देश इसके सख्त खिलाफ खड़े हो गए हैं।

इन सबके बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने एक ऐसा बयान दिया है, जिससे साफ लगता है कि वो अमेरिका और यूरोप की इस लड़ाई का भरपूर आनंद ले रहे हैं।

NATO की चेतावनी: ‘हमला किया तो अंत होगा’

ट्रंप की ग्रीनलैंड योजना से नाटो के यूरोपीय सहयोगी बेहद नाराज हैं। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई है कि नाटो देशों ने चेतावनी दे दी है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर जबरन कब्जा या हमला करने की कोशिश की, तो वे ग्रीनलैंड की रक्षा करेंगे। नाटो के मुताबिक, ऐसा कदम गठबंधन के अंत जैसा होगा।

दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने अपनी इस जिद्द को सही ठहराने के लिए ‘रूसी और चीनी आक्रमण’ का डर दिखाया था। ट्रंप का तर्क है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड नहीं लिया, तो रूस या चीन उस पर कब्जा कर लेंगे।

Putin का मास्टरस्ट्रोक: ‘हमारा इससे क्या लेना-देना?’

जहां ट्रंप रूस का नाम लेकर डरा रहे हैं, वहीं पुतिन ने बड़ी ही चालाकी से खुद को इस विवाद से अलग कर लिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में पुतिन ने चुटकी लेते हुए कहा:

“ग्रीनलैंड का क्या होगा, इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है। यह अमेरिका और उसके सहयोगियों का मामला है, मुझे लगता है कि वे इसे आपस में सुलझा लेंगे। निश्चित रूप से यह हमसे संबंधित नहीं है।”

पुतिन ने बातों-बातों में डेनमार्क पर भी निशाना साध दिया। उन्होंने कहा कि डेनमार्क ने हमेशा ग्रीनलैंड को एक ‘उपनिवेश’ (Colony) की तरह ट्रीट किया है और वहां के लोगों के प्रति कठोर रहा है।

रूस की खुशी की असली वजह: ‘फूट डालो और राज करो’

विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन की यह ‘तटस्थता’ दरअसल एक सोची-समझी रणनीति है।

  1. पश्चिमी एकता में दरार: अमेरिका और यूरोप का ग्रीनलैंड पर उलझना रूस के लिए फायदे का सौदा है। इससे पश्चिमी देशों (Western Alliance) की एकता कमजोर हो रही है।

  2. यूक्रेन से हटा ध्यान: जब तक अमेरिका और नाटो का ध्यान ग्रीनलैंड विवाद पर है, रूस को यूक्रेन युद्ध (Ukraine War) में अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए खुला मैदान मिल गया है।

  3. बिना बोले समर्थन: ट्रंप की आलोचना न करके पुतिन ने एक तरह से अमेरिका के भीतर और बाहर चल रही इस उथल-पुथल को हवा दे दी है।

फिलहाल, ग्रीनलैंड बर्फ का टुकड़ा नहीं, बल्कि कूटनीति का वह ज्वालामुखी बन गया है जिस पर नाटो की नींव हिल सकती है।

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