नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की आक्रामक ‘Tariff Policy’ के जवाब में दुनिया भर में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। कनाडा-चीन समझौते के बाद अब भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ मिलकर एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी कर ली है, जिसे एक्सपर्ट्स ‘Mother of All Deals’ कह रहे हैं। 26 जनवरी 2026 को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस (77th Republic Day) समारोह में यूरोप की सबसे बड़ी ताकतें बतौर Chief Guest शामिल होने जा रही हैं।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen और यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा (António Luís Santos da Costa) 25 से 27 जनवरी तक भारत के राजकीय दौरे पर रहेंगे। 27 जनवरी को दोनों नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें India-EU Summit की सह-अध्यक्षता करेंगे। माना जा रहा है कि यह डील ग्लोबल इकोनॉमी में अमेरिका के दबदबे को सीधी चुनौती देगी और ट्रेड बैरियर्स को खत्म करेगी।
Power of Alliance: $23 ट्रिलियन की ताकत और दुनिया का 33% ट्रेड
यह गठबंधन कितना शक्तिशाली होगा, इसका अंदाजा आंकड़ों से लगाया जा सकता है। भारत और EU मिलकर एक ऐसा आर्थिक ब्लॉक (Economic Block) बनाते हैं, जिसकी कुल आबादी 191.3 करोड़ है, यानी दुनिया की कुल जनसंख्या का 23%। World Bank के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में दोनों की संयुक्त Nominal GDP 23.41 ट्रिलियन डॉलर रही, जो ग्लोबल जीडीपी का 21% हिस्सा है।
व्यापार के मोर्चे पर यह साझेदारी ‘गेम चेंजर’ साबित होगी। भारत और यूरोपीय यूनियन मिलकर दुनिया के कुल Exports का 33% और Imports का 32% हिस्सा कंट्रोल करते हैं। ट्रंप के ‘Protectionism’ के दौर में यह डील सप्लाई चेन को अमेरिका पर निर्भरता से मुक्त कर सकती है।
Trade & Investment: भारत में 6,000 यूरोपीय कंपनियां
यूरोपीय संघ भारत का दूसरा सबसे बड़ा Trading Partner है। 2024 में दोनों के बीच 120 अरब यूरो का वस्तु व्यापार (Merchandise Trade) हुआ। खास बात यह है कि भारत अब EU के लिए सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि एक बड़ा निर्यातक (Exporter) भी बन गया है। भारत ने मशीनरी, केमिकल्स और टेक्सटाइल के दम पर EU को 71.3 अरब यूरो का निर्यात किया, जबकि आयात 48.8 अरब यूरो का रहा।
रिश्ता सिर्फ सामान बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि Foreign Direct Investment (FDI) में भी यूरोप ने खजाना खोल दिया है। भारत में इस वक्त करीब 6,000 यूरोपीय कंपनियां काम कर रही हैं। 2019 में जहां EU का FDI स्टॉक 82.3 अरब यूरो था, वह 2023 में बढ़कर 140.1 अरब यूरो हो गया है। 27 जनवरी को होने वाली बैठक में इस निवेश को दोगुना करने पर मुहर लग सकती है।


