Aruna Shankar Controversy: “समाज को बदनाम करना बंद करें”, पूर्व मेयर की टिप्पणी पर भड़का चंद्रवंशी समाज, दी आंदोलन की चेतावनी

Patrakar Babu News Desk
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Aruna Shankar Controversy

मेदिनीनगर (पलामू): मेदिनीनगर नगर निगम की पूर्व मेयर अरुणा शंकर द्वारा चंद्रवंशी समाज के खिलाफ दी गई एक कथित विवादित टिप्पणी के बाद पलामू की राजनीति गर्मा गई है। चंद्रवंशी समाज के युवा नेता अभिषेक राज ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे समाज के Self Respect (स्वाभिमान) पर हमला करार दिया है। अभिषेक राज ने पूर्व मेयर से तुरंत Public Apology (सार्वजनिक माफी) की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो आगामी Local Elections में उन्हें इसका करारा जवाब दिया जाएगा। समाज का आरोप है कि अरुणा शंकर ने अपने कार्यकाल के दौरान विकास के मोर्चे पर विफल रहने के बाद अब जनता का ध्यान भटकाने के लिए विभाजनकारी राजनीति का सहारा लिया है। अभिषेक राज ने सीधे सवाल किया है कि किसी समाज विशेष की एकजुटता और अस्तित्व पर सवाल उठाने का अधिकार पूर्व मेयर को किसने दिया? इस विवाद ने मेदिनीनगर में सामाजिक सौहार्द और Political Controversy को एक नया मोड़ दे दिया है।

विफलताओं से ध्यान भटकाने का आरोप: कार्यकाल की ‘Performance’ पर उठे सवाल

अभिषेक राज ने एक प्रेस वक्तव्य (Press Release) जारी कर कहा कि पूर्व मेयर को विकास और सुशासन की जिम्मेदारी दी गई थी, न कि किसी समाज विशेष पर अनर्गल आरोप लगाने का लाइसेंस। समाज का मानना है कि “दहशत” और “अराजकता” जैसे शब्दों का प्रयोग कर अरुणा शंकर ने सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने का प्रयास किया है। यह बयान उनकी संकीर्ण सोच को उजागर करता है, जो मेदिनीनगर के Socio-Economic Development के लिए घातक है। युवा नेता ने तंज कसते हुए कहा कि यदि पूर्व मेयर ने अपने कार्यकाल में जनहित के ठोस काम किए होते, तो आज उन्हें किसी समाज को कटघरे में खड़ा करने की जरूरत नहीं पड़ती। चंद्रवंशी समाज ने हमेशा लोकतंत्र की मर्यादा में रहकर समानता की लड़ाई लड़ी है, लेकिन अब उनके सम्मान पर हुए इस हमले का लोकतांत्रिक तरीके से करारा जवाब दिया जाएगा।

2026 चुनाव में ‘Electoral Response’ की तैयारी: युवाओं ने भरी हुंकार

चंद्रवंशी समाज के युवाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस तरह की बयानबाजी से डरने वाले नहीं हैं। अभिषेक राज के अनुसार, समाज अब एकजुट हो चुका है और अपनी गरिमा की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है। उन्होंने साफ कहा कि “ज़हर घोलने की राजनीति” अब पलामू में नहीं चलेगी। यदि अरुणा शंकर ने अपने शब्द वापस नहीं लिए, तो चुनाव में समाज उन्हें अपनी ताकत का अहसास कराएगा। इस Political Stand के बाद मेदिनीनगर में चुनावी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि सामाजिक अस्मिता से जुड़े इस मुद्दे का असर सीधे तौर पर वोटिंग पैटर्न पर पड़ सकता है। अब देखना यह है कि पूर्व मेयर इस विरोध पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं या यह विवाद और उग्र रूप धारण करता है।

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