पटना: बिहार विधान मंडल के Budget Session के तीसरे दिन आज सदन के बाहर और भीतर भारी हंगामा देखने को मिला। AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान के नेतृत्व में पार्टी के सदस्यों ने राज्य की बिगड़ती Law and Order (कानून-व्यवस्था) को लेकर नीतीश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विधायक ईमान ने सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि बिहार में अल्पसंख्यक (Minority) समुदाय और महिलाएं अब कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है। अख्तरुल ईमान ने बेगूसराय और दरभंगा की हालिया जघन्य घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न चिह्न लगाए। उन्होंने बताया कि बेगूसराय के शाहजहां दरगाह इलाके में अतर हुसैन की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई और दरभंगा में छह बच्चों की मां हिना के साथ Rape and Murder जैसी खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया। AIMIM विधायकों ने इन मुद्दों को लेकर बैनर और पोस्टरों के साथ प्रदर्शन करते हुए सरकार विरोधी नारेबाजी की।
‘दाढ़ी और टोपी’ के नाम पर निशाना बनाने का आरोप, कानून-व्यवस्था पर सवाल
विधायक अख्तरुल ईमान ने सरकार पर भेदभावपूर्ण राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में आज दाढ़ी और टोपी के नाम पर लोगों को टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “जो लोग दूसरों के शासन को ‘जंगलराज’ कहते थे, आज उनके राज में बेटियों की इज्जत आबरू सुरक्षित नहीं है।” उनके अनुसार, राज्य में न तो व्यापारी सुरक्षित हैं और न ही आम नागरिक, क्योंकि Criminal Elements (आपराधिक तत्वों) के मन से कानून का खौफ खत्म हो चुका है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार केवल एकतरफा कानून बना रही है और विशेष समुदायों के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रसित है। AIMIM ने मांग की कि सरकार इन गंभीर आपराधिक मामलों में तुरंत सख्त Action (कार्रवाई) ले और दोषियों को कड़ी सजा दिलाए, ताकि जनता का प्रशासन पर भरोसा बहाल हो सके।
कब्रिस्तान की जमीनों पर ‘Illegal Encroachment’ का मामला गरमाया
रिपोर्ट के अनुसार, अख्तरुल ईमान ने नालंदा, समस्तीपुर और अन्य जिलों में कब्रिस्तान की जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों (Illegal Encroachment) का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर कब्रिस्तान की जमीनों पर जबरन सड़कें बना दी गई हैं और बस्तियां उजाड़ी जा रही हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन इन शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। AIMIM ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने Minority Rights और कब्रिस्तान की जमीनों के संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो उनका आंदोलन सदन से लेकर सड़क तक और भी उग्र होगा। बजट सत्र के तीसरे दिन हुए इस विरोध प्रदर्शन ने सरकार की मुश्किलों को बढ़ा दिया है और अब विपक्ष भी इन मुद्दों पर एकजुट होता दिख रहा है।


