दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र अंतर्गत हरिनगर गांव में ₹2.47 लाख की ‘Pending Wage’ (मजदूरी) को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद एक भीषण ‘Caste Violence’ में तब्दील हो गया है। 30 और 31 जनवरी 2026 को हुई इस हिंसा के बाद पुलिस ने त्वरित ‘Action’ लेते हुए 70 नामजद और 150 अज्ञात ब्राह्मण समुदाय के लोगों के खिलाफ ‘SC/ST Act’ सहित कई गंभीर धाराओं में ‘F.I.R’ दर्ज की है। ‘SDPO Biroul’ ने अब तक 12 मुख्य आरोपियों की ‘Arrested’ होने की पुष्टि की है, जबकि गिरफ्तारी के डर से गांव के अधिकांश पुरुष फरार हैं। घटना की शुरुआत 30 जनवरी को हुई जब कैलाश पासवान ने हेमकांत झा के परिजनों को रोककर बकाया मजदूरी की मांग की, जिसका एक ‘Live Video’ भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसके बाद विवाद इतना बढ़ा कि 31 जनवरी को दोनों समुदाय आमने-सामने आ गए। आरोप है कि ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने पासवान टोला पर हमला कर घर-दुकानों में तोड़फोड़ की, जिसमें 11 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों का इलाज ‘DMCH’ (दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल) में चल रहा है।
₹2.47 Lakh का बकाया और ‘Live Video’ का सच
इस पूरे विवाद की जड़ मकान निर्माण की बकाया राशि है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि मजदूरी मांगने पर ‘Dominant Groups’ ने उन पर जानलेवा हमला किया। वहीं, दूसरे पक्ष का दावा है कि विवाद केवल लेन-देन का था, जिसे जानबूझकर ‘Caste Color’ दिया गया है। घटना के ‘Live Video’ में दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी बहस साफ देखी जा सकती है। इसी वीडियो और ‘Field Investigation’ के आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान कर रही है। हिंसा के बाद हरिनगर गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। ‘SDPO’ प्रभाकर तिवारी ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन एहतियातन गश्त जारी है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर ही ‘Criminal Charges’ तय किए जाएंगे। इस बीच, गांव में दहशत का माहौल है और कई परिवारों ने पुलिसिया कार्रवाई के डर से घर छोड़ दिया है।
SC/ST आयोग की एंट्री और ‘Investigation’ पर सवाल
राज्य अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्यक्ष धनंजय कुमार उर्फ मृणाल पासवान ने ‘DMCH’ पहुँचकर पीड़ितों का हाल जाना। उन्होंने इस घटना को ‘Danga’ (दंगा) के समान बताते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। आयोग ने पीड़ितों के लिए ‘Compensation’ (मुआवजा) और मुफ्त ‘Medical Treatment’ का आश्वासन दिया है। सांसद चिराग पासवान ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। हालांकि, इस ‘F.I.R’ को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि 150 अज्ञात और 70 नामजद लोगों की सूची में कई ऐसे नाम भी शामिल हैं जो घटना के समय गांव में मौजूद ही नहीं थे। कार्यकर्ताओं ने ‘Police Administration’ से मांग की है कि ‘Real Culprits’ को सजा मिले, लेकिन निर्दोषों को परेशान न किया जाए। ‘Investigation Team’ अब ‘Digital Evidence’ और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर नामजद सूची की स्क्रूटनी कर रही है।


