बिहार के Nalanda जिले के रहुई प्रखंड अंतर्गत पैठना पंचायत में कड़ाके की ठंड के बावजूद Devotees की भारी भीड़ उमड़ रही है। यहां आयोजित ‘विश्व मोहिनी दिग्विजय नारदमोह रामलीला’ (Nalanda Ramlila) के 23वें दिन आज हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। 7 दिसंबर 2025 को शुरू हुए इस Grand Event में शुक्रवार को रावण के पुत्र नाराणतक वध (Narantak Vadh) का सजीव मंचन किया गया, जिसे देखने के लिए समूचे क्षेत्र से लोग एकत्रित हुए। पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि वीरेंद्र कुमार उर्फ पिंकू द्वारा उद्घाटित यह कार्यक्रम अब अपने चरम पर है। हाड़ कंपाने वाली शीतलहर के बावजूद दर्शकों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। रात के समय आयोजित होने वाली इस Ramlila की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 23 दिन बीत जाने के बाद भी यहां Crowd Management के लिए प्रशासन और आयोजकों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
Interstate Artists की शानदार Live Performance
इस रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता इसके Professional Artists हैं। जवाहर पांडे की कलाकार टीम में बनारस, भभुआ, शेखपुरा और नालंदा के अनुभवी कलाकार शामिल हैं। इन कलाकारों की Live Performance और संवाद अदायगी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। ‘नाराणतक वध’ के मंचन के दौरान कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की गई झांकी ने उपस्थित हजारों लोगों को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। सुपरवाइजर मोहित कुमार के अनुसार, इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य Sanatan Dharma का प्रचार-प्रसार और समाज में आपसी भाईचारे को मजबूत करना है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए स्थानीय युवाओं की एक बड़ी टीम भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।
Social Unity और धार्मिक आस्था का संगम
पैठना पंचायत की यह रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि Social Unity का प्रतीक बन गई है। कार्यक्रम में मुखिया सुशीला कुमारी, मुकेश कुमार, और अशोक प्रसाद सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग और ग्रामीण हिस्सा ले रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग के लोग इस Cultural Heritage को करीब से देखने और समझने के लिए देर रात तक कार्यक्रम स्थल पर डटे रहते हैं। आयोजकों का कहना है कि आने वाले दिनों में रामलीला के और भी महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि Devotees को किसी प्रकार की असुविधा न हो। नालंदा के रहुई क्षेत्र में इस आयोजन ने न केवल भक्ति का माहौल बनाया है, बल्कि स्थानीय व्यापार और मेलों को भी बढ़ावा दिया है।


