पलामू/नई दिल्ली: पलामू सांसद श्री विष्णु दयाल राम ने लोकसभा में नियम 377 के तहत अपने संसदीय क्षेत्र के आदिवासियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। सांसद ने केंद्र सरकार से पलामू जिले के रामगढ़ और गढ़वा जिले के बड़गड़ प्रखंड में ‘Eklavya Model Residential School’ (EMRS) की स्थापना के लिए तत्काल ‘Official Notification’ जारी करने का आग्रह किया है। यह मांग क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य होने और वहां आधुनिक शिक्षा सुविधाओं के अभाव को देखते हुए की गई है। सदन को जानकारी देते हुए श्री राम ने कहा कि रामगढ़ और बड़गड़ प्रखंडों में अनुसूचित जनजाति (ST) की आबादी क्रमशः 49.9% और 60% है। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद इन क्षेत्रों में आवासीय शिक्षा की कमी है, जिसके कारण छात्रों में ‘Dropout Rate’ लगातार बढ़ रही है। सांसद का मानना है कि यदि इन प्रखंडों में स्कूल स्वीकृत होते हैं, तो दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शिक्षा का अभाव: आंकड़ों की जुबानी
सांसद ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि बड़गड़ प्रखंड में 66,092 की कुल जनसंख्या में से 39,653 लोग अनुसूचित जनजाति समुदाय से हैं। शिक्षा का उचित इंफ्रास्ट्रक्चर न होने की वजह से ये छात्र ‘Better Educational Opportunities’ से वंचित रह जाते हैं। श्री राम ने जोर देकर कहा कि आवासीय सुविधाओं के अभाव में मेधावी छात्र भी अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हैं, जो क्षेत्र के विकास में एक बड़ी बाधा है। उन्होंने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि इन आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में शिक्षा पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। शिक्षा की कमी न केवल छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि पूरे क्षेत्र के ‘Socio-Economic Development’ (सामाजिक-आर्थिक उत्थान) की गति को भी धीमा कर रही है।
EMRS Scheme से बदलेगी पलामू और गढ़वा की तस्वीर
सांसद विष्णु दयाल राम ने जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs) से अनुरोध किया है कि ‘EMRS Scheme’ के तहत इन दोनों प्रखंडों में एक-एक विद्यालय की स्थापना की जाए। ‘Eklavya Model Residential School’ का उद्देश्य आदिवासियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक अवसंरचना और समग्र विकास के अवसर प्रदान करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जल्द ही आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने अंत में कहा कि रामगढ़ और बड़गड़ में इन स्कूलों की स्थापना केवल एक शैक्षणिक सुधार नहीं, बल्कि इन क्षेत्रों के भविष्य को संवारने वाला एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। यदि सरकार इसे जल्द स्वीकृति प्रदान करती है, तो आगामी शैक्षणिक सत्र से ही छात्रों को इसका लाभ मिलना शुरू हो सकता है।


