Saharsa में Filariasis Elimination Campaign की शुरुआत: DM ने खुद दवा खाकर दिया संदेश, घर-घर पहुँचेंगे स्वास्थ्यकर्मी

Patrakar Babu News Desk
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Saharsa Filariasis Campaign 2026

सहरसा (Saharsa) को फाइलेरिया मुक्त बनाने के उद्देश्य से ‘सर्वजन दवा सेवन’ (Mass Drug Administration) कार्यक्रम का जिले में औपचारिक आगाज हो गया है। सदर अस्पताल परिसर में आयोजित एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम में District Magistrate (DM) Deepesh Kumar ने स्वयं डीईसी, आइवरमेक्टिन और एल्बेंडाजोल दवाओं का सेवन कर इस महा-अभियान की शुरुआत की। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम जनता के मन से दवा के प्रति डर को निकालना और जिले को हाथीपांव जैसी लाइलाज बीमारी से सुरक्षित करना है। जिलाधिकारी ने अभियान के शुभारंभ पर कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है जो व्यक्ति को आजीवन विकलांग बना सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संक्रमण को केवल सामूहिक दवा सेवन (MDA) के माध्यम से ही जड़ से मिटाया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें अब सहरसा के सभी प्रखंडों में घर-घर जाकर Target Beneficiaries को अपनी निगरानी में दवा खिलाएंगी, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति इस सुरक्षा चक्र से वंचित न रहे।

Eligibility Criteria: किन लोगों को नहीं खानी है यह दवा?

अभियान के दौरान सुरक्षा और Safety Protocols का विशेष ध्यान रखा गया है। सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया है कि यह दवा सभी के लिए अनिवार्य है, लेकिन कुछ विशेष श्रेणियों के लिए Eligibility Criteria तय किए गए हैं। अभियान के तहत 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और Seriously Ill (गंभीर रूप से बीमार) व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जाएगी। शेष सभी नागरिकों को स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा उपलब्ध कराई गई दवाओं का सेवन करना होगा। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि कोई भी व्यक्ति दवा को घर पर न रखे, बल्कि स्वास्थ्यकर्मी की मौजूदगी में ही उसका सेवन करें। इस Selection Process का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दवा का सही डोज सही व्यक्ति तक पहुँचे और किसी भी संभावित साइड-इफेक्ट की स्थिति में तत्काल सहायता दी जा सके।

‘फाइलेरिया मुक्त सहरसा’ के लिए प्रशासन का सख्त Monitoring Plan

जिला प्रशासन ने इस Mass Drug Administration अभियान को सफल बनाने के लिए एक व्यापक Monitoring Plan तैयार किया है। डीएम दीपेश कुमार ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे स्वास्थ्य विभाग की टीमों का सहयोग करें। अभियान के दौरान ‘दवा आपके द्वार’ की नीति अपनाई जा रही है, जिससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को सदर अस्पताल आने की आवश्यकता नहीं होगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फाइलेरिया के लक्षण कई वर्षों बाद दिखाई देते हैं, इसलिए स्वस्थ दिखने वाले लोगों के लिए भी यह दवा लेना बेहद जरूरी है। इस Public Health Initiative के तहत तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे दवा वितरण के साथ-साथ लोगों को स्वच्छता और मच्छरदानी के उपयोग के प्रति भी जागरूक करें।

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