नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाए जाने वाले ‘बसंत पंचमी’ (Basant Panchami) के त्योहार की तैयारियां जोरों पर हैं। इस साल यह पावन पर्व 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। यह दिन विद्या, बुद्धि और कला की देवी Maa Saraswati को समर्पित है।
शुक्रवार का दिन होने के कारण इस बार बसंत पंचमी का महत्व और भी बढ़ गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से मां शारदा की पूजा करने से छात्रों को कुशाग्र बुद्धि और कलाकारों को नई ऊर्जा मिलती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन हर तरफ सिर्फ ‘पीला रंग’ (Yellow Color) ही क्यों दिखाई देता है?
Shubh Muhurat: कब करें पूजा?
23 जनवरी को बसंत पंचमी के दिन पूजा का विशेष मुहूर्त (Shubh Muhurat) सुबह से ही शुरू हो जाएगा।
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पूजा का सर्वोत्तम समय: सुबह 07:15 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक।
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यह करीब 5 घंटे का समय छात्रों और संगीत साधकों के लिए अपनी किताबें और वाद्य यंत्र पूजने के लिए सबसे शुभ है।
Why Yellow Color: बसंत पंचमी पर पीला रंग ही क्यों?
बसंत पंचमी को ‘ऋतुराज बसंत’ के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनने और पीला भोजन करने के पीछे वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों कारण हैं:
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प्रकृति का श्रृंगार: इस मौसम में सरसों की फसल लहलहाती है और धरती पीली चादर ओढ़े नजर आती है। पीला रंग ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है।
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मां सरस्वती का प्रिय: मान्यता है कि जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तो मां सरस्वती के अवतरण के समय ब्रह्मांड में पीली आभा (Aura) फैल गई थी। इसलिए पीला रंग मां शारदा को सबसे प्रिय है।
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ग्रह शांति: ज्योतिष में पीला रंग Devguru Brihaspati (Jupiter) का भी प्रतीक है, जो ज्ञान और भाग्य के कारक हैं।
Saraswati Bhog: मां को क्या चढ़ाएं?
पूजा के दौरान मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए सिर्फ पीली चीजों का ही भोग (Prasad) लगाना चाहिए। इससे ज्ञान और वाणी का आशीर्वाद मिलता है।
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केसरिया भात (Meethe Chawal): इसे बसंत पंचमी का सबसे पारंपरिक भोग माना जाता है।
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बूंदी के लड्डू: गणेश जी के साथ-साथ मां सरस्वती को भी यह प्रिय है।
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बेसन का हलवा या मालपुआ: घर पर शुद्ध घी में बना पीला हलवा चढ़ाना उत्तम फलदायी होता है।
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राजभोग: अगर संभव हो तो पीली मिठाई ‘राजभोग’ भी अर्पित कर सकते हैं।
पूजा के बाद अपनी किताबों, पेन और वाद्य यंत्रों पर हल्दी का तिलक जरूर लगाएं और “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
(डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। हम इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करते। किसी भी उपाय के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।)


