नई दिल्ली: क्या आप जानते हैं कि हिंदू धर्म और भारतीय ज्योतिष शास्त्र में 24 घंटे के दिन को घंटों में नहीं, बल्कि ‘8 प्रहर’ (8 Prahars) में बांटा गया है? एक प्रहर लगभग 3 घंटे का होता है। सूर्योदय से लेकर अगले सूर्योदय तक चलने वाले इन प्रहरों का सीधा कनेक्शन ग्रहों की ऊर्जा और हमारे जीवन की सफलता से है।
शास्त्रों के अनुसार, हर प्रहर का अपना एक विशेष देवता और ऊर्जा होती है। अगर हम सही प्रहर में सही काम (जैसे- पूजा, खरीदारी या यात्रा) करें, तो परिणाम सकारात्मक मिलते हैं। वहीं, गलत समय पर किया गया काम धन हानि और अशांति ला सकता है। आइए जानते हैं दिन के 8 प्रहरों का पूरा टाइम टेबल और उनके नियम।
दिन के प्रहर (Day Time Prahars)
1. प्रथम प्रहर (सूर्योदय से सुबह 9 बजे तक): आध्यात्मिक शुरुआत यह समय ब्रह्म मुहूर्त से शुरू होता है। ऊर्जा सबसे सात्विक होती है।
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क्या करें: ध्यान, योग, स्नान, गणेश-सरस्वती पूजा और पढ़ाई।
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क्या न करें: झगड़ा, नकारात्मक बातें, मांसाहार। इस समय कोई भी नया काम या खरीदारी शुरू करना शुभ नहीं माना जाता।
2. द्वितीय प्रहर (सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक): अर्थ और कर्म सूर्य की ऊर्जा बढ़ने लगती है, जिससे कार्यक्षमता चरम पर होती है।
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क्या करें: नई शुरुआत, ऑफिस का काम, शेयर बाजार या निवेश। Shopping Tip: धातु या इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने के लिए यह सबसे शुभ समय है।
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क्या न करें: आलस्य, विवाद या नकारात्मक निर्णय।
3. तृतीय प्रहर (दोपहर 12 से 3 बजे तक): विश्राम काल सूर्य सिर पर होता है लेकिन ऊर्जा ढलने लगती है। इसे थोड़ा भारी समय माना जाता है।
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क्या करें: भोजन और थोड़ा विश्राम।
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क्या न करें: मांगलिक कार्य (विवाह आदि) या नया बिजनेस शुरू करना। इस समय खरीदारी से बचें, क्योंकि ऊर्जा असंतुलित होती है।
4. चतुर्थ प्रहर (दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक): संधि काल यह सूर्यास्त की ओर जाने का समय है।
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क्या करें: संध्या वंदन, गायत्री मंत्र जाप और घर की सफाई।
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क्या न करें: सोना-चांदी या नया वाहन खरीदना इस समय शुभ नहीं माना जाता। कोई बड़ा फैसला लेने से भी बचें।
रात्रि के प्रहर (Night Time Prahars)
5. पंचम प्रहर (शाम 6 से रात 9 बजे तक): लक्ष्मी आगमन रात्रि की शुरुआत और चंद्रमा का उदय। यह समय ‘गोधूलि बेला’ के बाद का है।
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क्या करें: घर के मंदिर में दीया जलाएं, लक्ष्मी-गणेश पूजा करें और परिवार के साथ समय बिताएं।
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क्या न करें: खरीदारी बिल्कुल न करें और न ही कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करें।
6. षष्ठ प्रहर (रात 9 से 12 बजे तक): तंत्र और साधना
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क्या करें: हनुमान चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ। यह समय तांत्रिक या गुप्त साधनाओं के लिए भी जाना जाता है।
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क्या न करें: घर से बाहर निकलना, यात्रा या खरीदारी।
7. सप्तम प्रहर (रात 12 से 3 बजे तक): निद्रा काल यह रात्रि का सबसे गहरा समय है।
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क्या करें: गहरी नींद (Deep Sleep) या उच्च कोटि का ध्यान (योग निद्रा)।
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क्या न करें: जागना या कोई भी भौतिक कार्य करना।
8. अष्टम प्रहर (सुबह 3 से सूर्योदय तक): अमृत वेला इसे ‘ब्रह्म मुहूर्त’ भी कहते हैं। 24 घंटों में सबसे शक्तिशाली समय।
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क्या करें: ध्यान, ईश्वर स्मरण और दिन की योजना बनाना।
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क्या न करें: सोना (Sleeping) और कलह।
(डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और ज्योतिषीय जानकारियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करते। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)


