बिहार के Leader of Opposition तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने NEET छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या मामले (Rape and Murder Case) की जांच CBI को सौंपने के फैसले पर नीतीश सरकार को कड़ी चुनौती दी है। पटना में जारी अपने ‘Official Statement’ में तेजस्वी ने आरोप लगाया कि यह फैसला बिहार पुलिस की अक्षमता और राज्य के ‘Administrative Structure’ के पूरी तरह ध्वस्त होने का प्रमाण है। उन्होंने सरकार के इस कदम को महज ‘Headline Management’ करार दिया है। तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार की ‘Law and Order’ नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो सिस्टम एक बलात्कार और हत्या के केस को खुद नहीं सुलझा सकता, वह ‘Corrupt और Compromised’ हो चुका है। उनके अनुसार, NDA सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री केवल बड़ी-बड़ी डींगें हांकते हैं, लेकिन धरातल पर अपराधियों को पकड़ने में राज्य का ‘Professional Framework’ पूरी तरह विफल साबित हुआ है।
Navruna Case का हवाला और CBI की ‘Track Record’ पर सवाल
तेजस्वी यादव ने अपने तंज में ‘Navruna Case’ का उदाहरण देते हुए CBI की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि नवरुणा कांड जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में भी केंद्रीय एजेंसी पिछले 12-13 वर्षों से आरोपियों को पकड़ने में नाकाम रही है और अंततः जांच बंद कर दी गई। तेजस्वी ने आशंका जताई कि NEET छात्रा मामले में भी जांच को CBI के हवाले करना केवल मामले को ठंडे बस्ते में डालने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है।
‘Jungle Raj’ के नैरेटिव पर पलटवार और राजनीतिक घमासान
चुनावों के दौरान ‘Jungle Raj’ के मुद्दे पर घेरने वाले विरोधियों को जवाब देते हुए तेजस्वी ने पूछा कि अब बिहार की इस ‘भ्रष्ट विधि व्यवस्था’ की जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार अपनी विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए जांच एजेंसियों का सहारा ले रही है। तेजस्वी के इस तीखे प्रहार के बाद बिहार के ‘Political Corridors’ में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में सियासी पारा और चढ़ने की उम्मीद है।


