RJD Internal Crisis: पुत्र मोह में फंसे लालू? पार्टी और परिवार में छिड़ी ‘Civil War’, तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल

Kumar UttamPatrakar Babu News Desk
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RJD Internal Crisis

Patna, Bihar: Rashtriya Janata Dal (RJD) में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित (Expelled) किए जाने के बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी “जन शक्ति जनता दल” बना ली है, जिसने तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस Political Turmoil का सीधा असर हालिया चुनाव परिणामों पर भी दिखा, जहाँ महागठबंधन का नेतृत्व कर रहे तेजस्वी यादव महज 25 सीटों पर सिमट गए। कभी सीएम की रेस में सबसे आगे माने जाने वाले तेजस्वी अब बड़ी मुश्किल से नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) की कुर्सी बचा पाए हैं। इस संकट की मुख्य वजह पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष और टिकट वितरण (Ticket Distribution) में हुई कथित गड़बड़ियां बताई जा रही हैं। लालू परिवार की बड़ी बेटी रोहिणी आचार्य भी अब तेजस्वी के फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठा रही हैं। पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि तेजस्वी कुछ खास ‘करीबियों’ के प्रभाव में आकर जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिसका खामियाजा पूरी पार्टी को भुगतना पड़ रहा है।

Family Dispute: तेज प्रताप की बगावत और रोहिणी आचार्य के तीखे तेवर

लालू परिवार के भीतर की दरार अब पूरी तरह सार्वजनिक हो चुकी है। कभी तेजस्वी को अपना ‘अर्जुन’ और खुद को ‘कृष्ण’ बताने वाले तेज प्रताप यादव अब उन्हें ‘जयचंदों’ से घिरा हुआ बता रहे हैं। वहीं, तेजस्वी की बड़ी बहन रोहिणी आचार्य ने भी राज्यसभा सांसद संजय यादव (Sanjay Yadav) और रमीज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रोहिणी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद महज एक ‘Puppet’ (कठपुतली) तक करार दिया है। रोहिणी आचार्य का सीधा हमला उन ‘सलाहकारों’ पर है जो तेजस्वी के बेहद करीब माने जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की है कि पार्टी को बचाने के लिए इन बाहरी तत्वों को बाहर करना होगा। परिवार के भीतर की इस Internal Rebellion ने राजद के कोर वोट बैंक के बीच भी भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है, जिससे पार्टी का भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा है।

RJD Election Result: टिकट वितरण में धांधली और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी

पार्टी के भीतर केवल पारिवारिक कलह ही नहीं, बल्कि चुनावी मैनेजमेंट (Election Management) को लेकर भी भारी आक्रोश है। वरिष्ठ नेता भाई वीरेंद्र जैसे दिग्गजों ने टिकट वितरण को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। चुनाव के दौरान राबड़ी आवास के बाहर एक कार्यकर्ता द्वारा संजय यादव पर पैसे मांगने का आरोप लगाते हुए हंगामा करना, पार्टी की छवि के लिए बड़ा Negative Factor साबित हुआ। राजद के कई पुराने नेताओं का मानना है कि पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। जहाँ एक तरफ भाई-भाई के बीच की लड़ाई ने ‘Jan Shakti Janata Dal’ के रूप में एक नया विकल्प खड़ा कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर ‘चाणक्य’ की भूमिका निभा रहे नेताओं पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों ने तेजस्वी यादव की Political Credibility को भारी चोट पहुंचाई है। अब देखना यह है कि क्या लालू प्रसाद यादव इस डूबती नैया को पार लगा पाएंगे।

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(जिला संवाददाता, मुजफ्फरपुर)
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