दावोस (स्विट्जरलैंड): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने 2026 की शुरुआत के साथ ही दुनिया भर में ‘Tariff War’ छेड़ दी है। ट्रंप प्रशासन अब एक ऐसा कदम उठाने जा रहा है जो ग्लोबल मार्केट में सुनामी ला सकता है। सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ‘Sanctioning Russia Act’ का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत रूसी तेल (Russian Oil) खरीदने वाले देशों पर 500% Tariff लगाने का प्रावधान है। इस भारी-भरकम जुर्माने की खबर ने भारत और चीन जैसे बड़े आयातकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
लेकिन, भारत के लिए राहत की खबर दावोस से आई है। World Economic Forum (WEF) में अमेरिकी वित्त मंत्री (US Finance Minister) स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में भारत की स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने संकेत दिया है कि भारत इस 500% वाले ‘टैरिफ बम’ की जद में आने से बच सकता है। बेसेंट ने कहा कि अमेरिका के सख्त फैसलों के बाद भारत ने अपनी पॉलिसी में बदलाव किया है, जो वाशिंगटन के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
India के लिए क्या है Scott Bessent का संदेश?
स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि जब अमेरिका ने भारत पर पहले से लागू 25% टैरिफ के ऊपर अतिरिक्त 25% टैरिफ (कुल 50%) लगाया, तो उसका असर दिखा। बेसेंट के दावे के मुताबिक, इस ‘Price Shock’ के बाद भारत ने रूस से तेल खरीदना काफी कम कर दिया या लगभग बंद कर दिया है।
चूंकि यह प्रस्तावित 500% का टैरिफ उन देशों को दंडित (Penalize) करने के लिए है जो अभी भी धड़ल्ले से रूसी तेल खरीदकर पुतिन की ‘War Chest’ भर रहे हैं, इसलिए भारत का बदला हुआ रुख उसे इस खतरे से बाहर रख सकता है। बेसेंट का यह बयान भारतीय बाजारों और कूटनीतिक हलकों (Diplomatic Circles) के लिए एक बड़ा Relief Signal माना जा रहा है।
China और Europe पर लटक रही तलवार
अमेरिका का असली निशाना चीन और यूरोपीय देश नजर आ रहे हैं। बेसेंट ने यूरोपीय देशों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि वे रूसी तेल खरीदकर “अपने ही खिलाफ युद्ध को फाइनेंस” कर रहे हैं। वहीं, चीन के लिए मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। चीन न केवल रूस, बल्कि ईरान और वेनेजुएला से भी तेल खरीदता है। बेसेंट ने चेतावनी दी कि अब वेनेजुएला के तेल सेक्टर पर ट्रंप का कंट्रोल है, इसलिए चीन को रियायती दरों (Discounted Rates) पर तेल मिलना मुश्किल होगा।
‘Sanctioning Russia Act of 2025’ अगर पास होता है, तो चीन के इंपोर्ट्स पर सीधा हमला होगा। बेसेंट ने साफ कर दिया कि चीन के साथ कैसा व्यवहार होगा, यह पूरी तरह राष्ट्रपति ट्रंप के आखिरी फैसले और ईरान के साथ चल रही स्थितियों पर निर्भर करेगा।


