Trump Tariff Attack: अमेरिका को जवाब देने के लिए China का ‘Plan B’, Canada और Iran के साथ की सीक्रेट डील

Patrakar Babu News Desk
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वाशिंगटन/बीजिंग: व्हाइट हाउस में वापसी के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्लोबल मार्केट में ‘Trade War’ का बिगुल फूंक दिया है। भारत, चीन और यहां तक कि NATO सहयोगी देशों को भी ट्रंप की ‘Tariff Threats’ का सामना करना पड़ रहा है। ग्रीनलैंड (Greenland) मुद्दे पर विरोध करने वाले 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाकर ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। लेकिन इस बार कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट है। अमेरिका के इस आर्थिक हमले की काट खोजने के लिए चीन ने अपने ‘Plan B’ पर काम शुरू कर दिया है, जो सीधे तौर पर अमेरिकी डॉलर (Dollar Dominance) और डिप्लोमेसी को चुनौती दे रहा है।

चीन की यह नई रणनीति ‘Defense’ नहीं बल्कि ‘Counter-Attack’ पर आधारित है। जहां ट्रंप दुनिया को टैरिफ से डरा रहे हैं, वहीं चीन ने चुपचाप कनाडा, ईरान और रूस के साथ पर्दे के पीछे (Back-channel) बड़ी Strategic Deals को अंजाम देना शुरू कर दिया है। इसका सबसे ताजा उदाहरण कनाडा के साथ हुआ समझौता है, जिसने ‘America First’ नीति को बड़ा झटका दिया है।

China Plan B: Canada और Iran के साथ क्या हुई डील?

ट्रंप के प्रेशर के बावजूद, कनाडा ने अपनी विदेश नीति में बड़ा यू-टर्न लिया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने एक चौंकाने वाला समझौता किया। इसके तहत कनाडा ने Chinese EVs (Electric Vehicles) पर लगने वाले 100% टैरिफ को भारी कटौती के साथ कम करने पर सहमति जताई है। बदले में, चीन ने कनाडा के Canola Seeds (कृषि उत्पाद) पर टैरिफ 84% से घटाकर 15% कर दिया है। यह सीधे तौर पर नॉर्थ अमेरिकन ट्रेड ब्लॉक में सेंधमारी है।

वहीं, मिडिल ईस्ट में भी चीन ने ट्रंप के ‘Sanctions’ की काट खोज ली है। ट्रंप ने ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, लेकिन चीन ने ईरान से तेल आयात (Oil Import) कम करने के बजाय उसे जारी रखा है। इसके लिए ‘Shadow Fleet’, थर्ड-पार्टी ट्रेडिंग हाउस और सबसे अहम— Yuan Settlement (चीनी मुद्रा में भुगतान) का सहारा लिया जा रहा है ताकि अमेरिकी डॉलर और बैंकिंग सिस्टम को बायपास किया जा सके।

India पर असर और चीन का 20 ट्रिलियन डॉलर वाला दांव

ट्रंप के टैरिफ वार की आंच भारत तक भी पहुंची है, जिससे India-US Trade Deal अधर में लटकी हुई है। दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर चीन, भारत का ‘अघोषित समर्थक’ बनकर उभरा है। ग्लोबल मंचों और BRICS मीटिंग्स में चीन ने बिना नाम लिए भारत का पक्ष लेते हुए कहा कि “एकतरफा टैरिफ (Unilateral Tariffs) अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।” एक्सपर्ट्स इसे चीन की ‘Global South’ को अपने पाले में करने की रणनीति मान रहे हैं।

इतने प्रतिबंधों के बाद भी चीन की Economy ने सबको चौंका दिया है। National Bureau of Statistics (NBS) के ताजा डेटा के मुताबिक, 2025 में चीन की GDP 5% बढ़कर 20.01 ट्रिलियन डॉलर हो गई है। रूस के साथ Energy Deal, सऊदी अरब के साथ 5G/AI में सहयोग और फ्रांस से Airbus विमानों की खरीद यह बता रही है कि ड्रैगन अब अमेरिका के बिना भी अपना व्यापारिक साम्राज्य (Trade Empire) चलाने की तैयारी कर चुका है।

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