Muzaffarpur, Bihar: संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार, 25 जनवरी 2026 को मुजफ्फरपुर में एक उच्च-स्तरीय ‘Social Harmony Dialogue’ को संबोधित किया। बोचहा के गरहा स्थित ब्लू डायमंड होटल में आयोजित इस Public Event में भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत के वैश्विक नेतृत्व (Global Leadership) की राह में विदेशी शक्तियां बड़ी बाधाएं उत्पन्न कर रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक हिंदू समाज एकजुट होकर अपनी आंतरिक खामियों को दूर नहीं करेगा, तब तक देश को बाहरी खतरों से सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण होगा। मोहन भागवत ने अपने संबोधन में ‘Data-First Architecture’ के तहत समाज की समस्याओं का समाधान ब्लॉक और ग्राम स्तर पर खोजने की वकालत की। उन्होंने कहा कि भारत के Economic Growth और बढ़ते प्रभाव से कुछ देशों को अपनी “दुकानें बंद होने” का डर सता रहा है, जिसके कारण वे भारत के आंतरिक मामलों में फूट डालने का प्रयास कर रहे हैं। भागवत ने ‘Sajjan Shakti’ (सज्जन शक्ति) को जागृत करने का आह्वान करते हुए कहा कि केवल सरकारी व्यवस्था से बदलाव संभव नहीं है, इसके लिए Ground Reality पर सामाजिक बदलाव जरूरी है।
‘Hindu Rashtra’ और Population Policy पर मोहन भागवत का कड़ा संदेश
जनसंख्या नियंत्रण (Population Control) के संवेदनशील मुद्दे पर बोलते हुए सरसंघचालक ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि Total Fertility Rate (TFR) के लिए सरकार 2.1 का मानक तय करती है, लेकिन हिंदू समाज को तीन बच्चे पैदा करने से किसी ने रोका नहीं है। इसके साथ ही, ‘Hindu Rashtra’ के सवाल पर उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत को अलग से हिंदू राष्ट्र घोषित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह पहले से ही एक हिंदू राष्ट्र है। उन्होंने ‘Diversity vs Division’ के अंतर को समझाते हुए कहा कि भारत में विविधता तो है, लेकिन अलगाव (Separation) नहीं होना चाहिए। अंग्रेजों ने इसी अलगाव का फायदा उठाकर शासन किया था। भागवत ने चेतावनी दी कि यदि हिंदू समाज एकजुट होकर समस्याओं पर चिंतन नहीं करेगा, तो विदेशी ताकतें फिर से देश की एकता को तोड़ने का प्रयास करेंगी।
स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता और ‘Social Harmony’ का संकल्प
RSS प्रमुख ने ‘Centenary Year’ के संकल्पों को दोहराते हुए कहा कि संपन्न लोगों को ही नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को ‘Service Sector’ और अभावग्रस्त लोगों की मदद के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कई गांवों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे ग्रामीणों ने बिना किसी सरकारी मदद के स्थानीय समस्याओं का समाधान किया है। उन्होंने आह्वान किया कि संघ की आगामी बैठकों में सभी जातियों और बिरादरी के लोगों को एक साथ बैठना चाहिए ताकि ‘Social Equality’ सुनिश्चित की जा सके। इस संवाद सत्र के दौरान मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली और पूर्णिया के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अपने द्वारा किए गए Social Work जैसे गरीब बच्चों की शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराने की जानकारी साझा की। कार्यक्रम में क्षेत्र कार्यवाह मोहन सिंह, क्षेत्र संघचालक देवव्रत पाहन और प्रांत प्रचारक रविशंकर सिंह सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।


