Trump के ‘Gaza Peace Board’ में शामिल होना पाकिस्तान को पड़ा भारी! शहबाज सरकार पर लगा ‘गुलामी’ का आरोप, विपक्ष हुआ लाल

Patrakar Babu News Desk
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इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की नई पहल ‘गाजा पीस बोर्ड’ (Gaza Peace Board) में शामिल होने का फैसला पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के लिए गले की हड्डी बन गया है। सरकार ने अमेरिका का न्योता तो स्वीकार कर लिया, लेकिन अब उसे अपने ही देश में भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

विपक्ष, धार्मिक नेताओं और बुद्धिजीवियों ने इसे “नैतिक रूप से गलत” और “फिलिस्तीनियों के साथ धोखा” करार दिया है।

विपक्ष का हमला: ‘ये नए जमाने की गुलामी है’

शहबाज सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए पाकिस्तानी सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।

  • आरोप: उन्होंने कहा कि यह बोर्ड जंग के बाद गाजा को ‘बाहरी लोगों’ द्वारा चलाने के लिए बनाया गया है। यह फिलिस्तीनियों से उनका अपना राज चलाने का अधिकार छीनता है।

  • कड़ा बयान: अब्बास ने कहा, “जब गाजा की सुरक्षा और राजनीति बाहरी लोगों को दे दी जाती है, तो यह नए जमाने की गुलामी जैसा लगता है।”

तहरीक-ए-तहफ्फुज-ए-आईन-ए-पाकिस्तान के नेता मुस्तफा नवाज खोकर ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया:

  • उन्होंने कहा कि यह बोर्ड UN (संयुक्त राष्ट्र) के समानांतर एक दूसरा सिस्टम खड़ा करने की कोशिश है।

  • खोकर ने चेतावनी दी कि इस बोर्ड के नियम ट्रंप को ‘असीमित ताकत’ देते हैं, जिससे अमेरिका अपना एजेंडा बिना रोक-टोक लागू कर सकेगा।

इसके अलावा, अमेरिका में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी और वरिष्ठ पत्रकार जाहिद हुसैन ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

सरकार की सफाई: ‘मंच पर रहना जरूरी है’

चौतरफा घिरने के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सरकार के फैसले का बचाव किया है।

  • तर्क: आसिफ का कहना है कि अगर पाकिस्तान इस मंच से दूर रहता है, तो वहां लिए जाने वाले फैसलों में उसकी कोई अहमियत नहीं रह जाएगी।

  • फायदा: उन्होंने दलील दी कि बोर्ड में शामिल होकर पाकिस्तान अपने “फिलिस्तीनी भाइयों” के लिए ज्यादा बेहतर तरीके से आवाज उठा सकेगा।

कौन-कौन से देश हैं ट्रंप के साथ?

व्हाइट हाउस के मुताबिक, करीब 50 देशों को न्योता भेजा गया है, जिनमें से कई ने इसे स्वीकार कर लिया है। पाकिस्तान के अलावा इस लिस्ट में शामिल प्रमुख देश हैं:

  • अरब देश: संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मिस्र, मोरक्को।

  • अन्य: अर्जेंटीना, आर्मीनिया, अजरबैजान, बेलारूस, हंगरी, कजाखस्तान, कोसोवो और वियतनाम।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान ने यह कदम अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को सुधारने और आर्थिक मदद की उम्मीद में उठाया है, लेकिन फिलिस्तीन समर्थक जनभावना के चलते यह फैसला सरकार पर भारी पड़ सकता है।

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