पटना: बिहार में BPSC TRE 4 Notification को लेकर अभ्यर्थियों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। छात्र नेता दिलीप कुमार ने सरकार को सीधा अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर शिक्षक भर्ती का विज्ञापन (Official Notification) जल्द जारी नहीं किया गया, तो 16 फरवरी को राजधानी की सड़कों पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। यह नाराजगी उस समय सामने आई है जब नीतीश सरकार ने 2025 से 2030 के बीच ‘एक करोड़ नौकरी और रोजगार’ देने का वादा किया है। बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कैबिनेट ने रोजगार के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर मुहर लगाई थी, जिससे राज्य के युवाओं में भारी उम्मीदें जगी थीं। हालांकि, हालिया BPSC Calendar में TRE 4 भर्ती का कोई स्पष्ट उल्लेख न होने से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। शिक्षा विभाग (Education Department) के लगातार आश्वासनों के बावजूद विज्ञापन जारी न होना छात्रों के बीच गहरी निराशा का कारण बना हुआ है।
BPSC Calendar में रिक्तियों का जिक्र नहीं, अभ्यर्थियों में बढ़ी बेचैनी
बिहार सरकार ने पूर्व में डोमिसाइल नीति (Domicile Policy) और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू कर स्थानीय युवाओं को बड़ी राहत दी थी। इसके तहत बड़े पैमाने पर नियुक्तियां भी की गईं, लेकिन अब Selection Process के अगले चरण यानी TRE 4 को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि शिक्षा मंत्री और विभाग सिर्फ समय टाल रहे हैं, जबकि धरातल पर रिक्तियों (Vacancies) की घोषणा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं का कहना है कि सरकार चुनाव से पहले विज्ञापन निकालकर केवल राजनीतिक लाभ लेना चाहती है। यदि सरकार ने समय रहते Apply Online की प्रक्रिया शुरू करने के लिए नोटिफिकेशन जारी नहीं किया, तो 16 फरवरी को होने वाला आंदोलन सरकार की मुश्किलों को बढ़ा सकता है।
16 फरवरी को महा-आंदोलन की तैयारी: छात्र नेता का बड़ा बयान
छात्र नेता दिलीप कुमार ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि अभ्यर्थियों की मांग जायज है। जब सरकार ने एक करोड़ नौकरियों का वादा किया है, तो शिक्षक भर्ती के Eligibility Criteria और विज्ञापन में देरी क्यों की जा रही है? उन्होंने चेतावनी दी है कि आश्वासन का दौर अब खत्म हो चुका है और अब छात्र केवल लिखित अधिसूचना (Official Notification) चाहते हैं। इस विरोध प्रदर्शन का असर सीधे तौर पर आगामी भर्ती चक्र पर पड़ सकता है। अब देखना यह है कि क्या शिक्षा विभाग 16 फरवरी से पहले कोई सकारात्मक कदम उठाता है या फिर बिहार की सड़कें एक बार फिर छात्रों के आक्रोश का गवाह बनेंगी।


